


Jail or bail हर कोई देशमे कानून व्यवस्था का निर्माण पार्लियामेंट द्वारा किया जाता हे, कुछ कानून सिविल प्रकारके होते हे जिसमे नुकसानी मुआवजा या अन्य प्रकार के न्यायी उपाय प्रदान किये जाते हे। विश्व के सभी देशोमे अपराध के लिए भी अलग-अलग प्रकारके कानून का निर्माण किया गया हे, भारतमें इंडियन पीनल कोड याने के भारतीय दंड संहिता का निर्माण किया गया हे, इंडियन पीनल कोड के साथ क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का भी निर्माण किया गया हे। अगर कोई नागरिक देश के कानून का पालन नहीं करता या फिर कोई जुर्म करता हे तो देश की पुलिस को कानून से प्राप्त सत्ता के आधार पर जुर्म करनेवाले नागरिक की गिरफ्तारी कर के नागरिक को कानून में नियत किये गए कुछ समय तक या फिर आजीवन जेलमे बंध कर सकती हे। कोईभी नागरिक हो उसको मानवाधिकार का रक्षण मिलता हे। कोई भी देश की पुलिसको कानून में निर्दिष्ट की गए कानून की सीमा में रह काम करना होता हे। कानूनी प्रक्रिया से जुड़े लोग याने की पुलिस, कोर्ट के जज,वकील, पत्रकार, नेता, डॉक्टर अभी को कानून के दायरेमें रहकर ही काम करके जनता में न्याय का भरोसा स्थापित करना होता हे या फिर न्याय के विश्वास को चट्टान की तरह मजबूत करके सामाजिक और कानून व्यवस्था श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण करने का उदेश्य होता हे।

कानून व्यवस्था के पालन हेतु कई गवर्नमेंट एजेंसी काम करती हे जिनको गुनाह करने वाले इंसान को गिरफ्तार करके उसे कोर्टसे सजा दिलवाने का या फिर इंसान निर्दोष हे तो बाइज्जत बरी करने का काम और प्रक्रिया करनी होती हे। पुलिस, सी.बी.आई., सी.आई.डी., ट्रैफिक पुलिस, सी.आर.पि.एफ., बी.एस.एफ. को कोईभी गुनाह करनेवाले व्यक्ति की या फिर शंकास्पद व्यक्तिकी गिरफ्तारी करनेका अधिकार या सत्ता कानून से प्रदान की गयी हे। जाँच एजेंसी को डायरी और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का उपयोग करके सारा प्रोसेस पूरा करना होता हे।

जब कोई इंसान को पुलिस पकड़कर ले जाती हे तब लोग मानते हे की उसने कोई गलत काम याने के गुनाह किया होगा,पुलिस गिरफ्तार किये गए इंसान को कोर्ट में प्रस्तुत करती हे और कोर्ट को व्यक्तिने क्या किया हे वो सब पुलिस कोर्ट को बताती हे, गुनाह दो प्रकार के होते हे (१) जमानत योग्य गुनाह (२) गैर जमानती गुनाह। कोनसा गुनाह जमानत योग्य गुनाह हे और कोनसा गुनाह गैर- जमानती गुनाह हे उसका विवरण क्रिमिनल प्रोसीजर कोड में किया गया हे पुलिस ने गिरफ्तार किये इंसान को गिरफ्तार होनेसे कुछ ही दिनोमे नामदार अदालत में जमानत याचिका दायर करनी होती हे।

गैर जमानती गुनाहमें ७ सालके ऊपर या फिर आजीवन कारावास तक के अपराधकी सजाके प्रावधान का समावेश किया गया हे।गैर जमानती गुनाहमें अदालत को अपने डिस्क्रिशनरी पावर का उपयोग करके जमानत याचिका का निर्णय करना होता हे, गैर जमानती अपराधमें अदालतको क्रिमिनल जस्टिस के मुलभुत सिधान्तो का अनुसरण करना होता हे, गैर जमानती अपराध में अदालतको नामदार सुप्रीम कोर्टके जस्टिस कृष्णा अय्यर ने १९९८मे जो सैद्धांतिक निर्णय किया हे वो निर्णय को फॉलो करना होता हे। वो सिद्धांत ये हे की BAIL IS RULE AND JAIL IS EXCEPTION गैर जमानती अपराधमें जमानत प्राप्त करने के लिए क्या-क्या सबमिट करना जरुरी हे इसकी चर्चा यहाँ करते हे (१) सी.आर.पी.सी. ४३७ के प्रावधान के मुताबिक जमानत के लिए लोअर कोर्टमे आरोपी को याचिका दाखिल करनी होती हे और सी.आर.पी.सी. ४३९ के प्रावधान के मुताबकि जमानत के लिए सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट में जमानत याचिका अरोपिको दाखिल करनी होती हे।

अग्रिम जमानत के लिए आरोपी सी.आर.पी.सी. ४३८ के तहत नामदार सुप्रीम कोर्ट या फिर नामदार हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता हे, अग्रिम जमानत पानेके लिए आरोपी को अदालतमे ये बताना पड़ेगा और विश्वास दिलाना पड़ेगा की वो उसके खिलाफ हो रही न्यायिक जाँच को प्रभावित या दूषित नहीं करेगा, जाँच को रुकने नहीं देगा, विटनेस को प्रभावित नहीं करेगा या किसी प्रकारकी हानि नहीं पहुचायेगा, आरोपी को अदालतको यह विश्वास दिलाना होगा की अंतिम निर्णय होने तक वो देश छोड़कर भाग नहीं जायेगा और अपना पासपोर्ट वो अदालतमे सर्रेंडर कर देगा, अगर रिमांड होगा तो उसमे वो जाँच अधिकारी को पूरा सहयोग करेगा ये सब बातोंका अदालतको विश्वास दिलाना होता हे, हियरिंग पूरा होने के बाद अदालत अग्रिम जमानत याचिका पर अपना निर्णय करेगी की आरोपी को अग्रिम जमानत मिलनी चाहिए या नहीं।

क्रिमिनल कानून के मुताबित जाँच अधिकारी को कानून में निर्दिष्ट किये गए प्रावधानों के तहत आरोपी के विरुद्ध नियत दिनोमे चार्जशीट दाखिल करनी होती हे, अगर जाँच अधिकारी नियत की गयी समय मर्यादामे चार्जशीट अदालतमे फाइल नहीं करते तो आरोपी को क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की सेक्शन ६७(२) के मुताबिक डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार आरोपी उपयोग कर सकता हे।

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