

Electricity act Gujarat-गुजरात हाईकोर्टकी तीन जजोकी बेन्चने स्पेशल सिविल एप्लीकेशन नंबर २५८२/ २०१२ में किये गए निर्णयमें रेगुलेशन ४.१. ११.(अमेंडेड फर्स्ट पार्ट) -गुजरात रेगुलेटरी कमीशन के नियमको इलेक्ट्रिसिटी-२००३ के कानूनकी सेक्शन ४३,५०,५६ और १८१ के विरुद्ध अल्ट्रावायरस घोषित किया गया। गुजरात हाईकोर्ट में दाखिल हुए केस की हकीकत इस प्रकार थी।
पिटीशनर कम्पनी मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड गुजरात के वापी जिलेमें लिक्विडेशन में ले जाने के लिए डिरेक्टरोने मुंबई हाईकोर्ट में प्रोसेस की। बॉम्बे हाईकोर्टने मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड का ऑक्सन संजय बलवंतराय देसाई की फेवरमे डिसाइड किया। और संजय बलवंतराय देसाईने ऑक्सन की रकम जमा करके प्रोसेस पूरी करदी। उसकेबाद पिटीशनरने प्रॉपर्टी के राइट्स अपने नाम करवाने के लिए डी.जी. वि. सी.एल.(दक्षिण गुजरात विज कंपनी) से नो ऑब्जेक्शन डिमांड की। जी.आई.डी.सी.ने दस्तावेज के आधार पर पिटीशनर संजय बलवँराई देसाई का नाम लीज होल्डर्स के तोर पर दाखिल किया।
प्रतिविवादी ने मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्धमें सिविल कोर्टमे रिकवरी के लिए केस दाखिल किया ये केस का निर्णय डी.जी. वि. सी.एल.(दक्षिण गुजरात विज कंपनी)की फेवर में हुआ उसके बाद डी.जी. वि. सी.एल.ने रिकवरी के लिए दरखास्त दाखिल की। पावर कनेक्शन मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड के फेवरमे जी.आई.डी.सी.ने प्रमाणित किया। पावर सप्लाय और वोल्टेज सप्लाय के लिए पीटीशनेरने दक्षिण गुजरात विज कंपनी में प्रिस्क्राइब फॉर्म में एप्लीकेशन की तब डी.जी. वि. सी.एल.(दक्षिण गुजरात विज कंपनी) ने पिटीशनर को लेटर लिखकर बताया की मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड का एरियर्स ड्यू हे जो आप भुकतान कर दीजिए।
पिटीशनर ने बहुत रकम खर्च कर दी थी इस प्लाट को खरीदने के लिए फिरभी पिटीशनर ने डी.जी. वि. सी.एल. को रूपये १७,१६,२५५/-की रकम चेक से जामं करवादी क्योकि उनको पावर सप्लाई लेना था, पिटीशनर ने रिस्पॉन्डेंट नंबर २ के पास जाकर डी.जी. वि. सी.एल.(दक्षिण गुजरात विज कंपनी) को दी गयी १७,१६,२५५/-रिफंड मांगी तब रिस्पॉन्डेंट नंबर २ने बॉम्बे हाईकोर्ट का हवाला देकर कहाकि बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय अनुसार कोई गवर्नमेंट ओथोरिटी की कोइभी रकम ड्यू नहीं हे इसीलिए कोईभी रकम आप किसीभी गवर्नमेंट ओथोरिटी को नहीं दे गवर्नमेंट ओथोरिटीमें डी.जी. वि. सी.एल.(दक्षिण गुजरात विज कंपनी)का समावेश हो जाता हे।तब पिटीशनरने मेसर्स अरुणेश प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिट्स द्वारा भुकतान कि गयी रकमको रिफंड लेने के लिए जरुरी प्रोसेस शरु करके अर्जी दाखिल की।
दूसरा, पिटीशनर के पास से गलत तरीकेसे रकम वसूल की गयी हे, तीसरा पिटीशनरने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा प्रमाणित ऑक्सनमें सभी कानूनका पालन करके मिलकत खरीद की हे इसीलिए पिटीशनर को रिफंड, वोल्टेज और सप्लाय मिलना चाहिए।
Electricity act Gujarat यह केसमें गुजरात हाईकोर्टने कानून के प्रावधानोंको देखा और पक्षकारो को अपना पक्ष रखनेका पूरा मौका दिया। गुजरात हाईकोर्टने देखा की गुजरात रेगुलेटरी कमीशनने ओवर स्टेप लिए हे और सेक्शन ५६(२) का वायोलेसन किया गया हे, गुजरात हाईकोर्टने देखा की जो अमेंडमेंट करके प्रोविजन बनाया गया हे वो रेगुलेशन ४. १. ११. का पहला हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदनेवाले मालिक को इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन प्रोवाइड करते वक्त लाईसेंसीकी शर्त इक्लेक्ट्रीसिटी एक्ट २००३ की सेक्शन ४३, ५०, ५६, १२६, और १८१(२) से वायोलेटिव होती दिखाई देती हे।
और प्रतिविवादीओ तरफसे जो सुप्रीम कोर्ट के पश्चिमाञ्चल के निर्णय पर भार दिया गया हे वो निर्णय यह केस का निर्णय करनेमें सहाय नहीं कर सकता क्योकि पश्चिमाञ्चल केस ईशा मार्बल केसमें कॉन्फ्लिक्ट दिखाई देती हे।
कृष्णा इंडस्ट्रीज विरुद्ध गुजरात इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के केसमे तय हुआ हे की " there is neither any petent, nor letent conflict between the provision contained in section 3(2)(f) and 22, read with clause VI of the schedule of the 1910 act and section 49 of the supply act. As a mater of fact there is nothing in the language of section 3(2)(f) and 22 of the 1910 act from which it can be inferred that the terms and conditions of supply act are subject to the provision contained in the 1910 act.
Our attention has not been drawn to any provision of the 1910 act which contains non-obstante clause and gives that act over-riding effect qua the supply act.in this view of the matter and the fact that the supply act is a subsequent legislation, it is not possible to agree with the learned counsel for the write petitioners that the clause 2(j) of the conditions of supply is ultra-vires to the section 3(2)(f) and 22 read with clause VI of the schedule of the 1910 act or section 26 of the supply act"ये केस भी ऑथोराइज़ रेगुलेटरी बोर्ड को यह विषय पर नियम बनाने का रेफरेन्स नहीं करता इसीलिए यह निर्णय भी बोर्ड को मददरूप नहीं होता।
केस के सारे मटेरियल को कंसीडर करते हुए ये फाइंडिंग करते हे की नया रेगुलेशन ४. १. ११. का पहला भाग जो गुजरात इलेक्ट्रिसिटी कमीशनने (इलेक्ट्रिक सप्लाय कोड एंड रिलेटेड मैटर्स ) (३ अमेंडमेंट ) रेगुलेशन, २०१०, लाइसेंसी नए प्रॉपर्टी परचेस करनेवाले कस्टमरसे पुराना ड्यूज़ रिकवर करनेमे असमर्थ हे और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट २००३ की सेक्शन ४३,५०, ५६, और १८१ से अल्ट्रा-वायर्स होता हे इसीलिए रेगुलेशन ४. १. ११ के फर्स्ट पार्ट को अल्ट्रा-वायर्स डिक्लेर करते हे और पिटीशनर की पिटीशन ऐलाव करते हे
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